बंगाली नववर्ष का पहला प्रिस्क्रिप्शन

 


नए साल के पहले प्रिस्क्रिप्शन में लिखा मैंने रोगी के प्रति प्यार,
दवाओं की हर पन्नी पर हो मेरी निःशब्द अनुभूति की बात।
रोगी के माथे का पसीना पोंछना चाहता हूँ थोड़ी सी ममता से,
इलाज से बढ़कर देता हूँ एक मजबूर दिल को सच्चा प्यार।

जब अस्पताल की दीवारों पर बसंत की रोशनी पड़ती है,
मैं हर रास्ते पर रोगी की सेहतभरी मुस्कान ढूँढता हूँ।
रोगी की आँखों में थकान देख दिल मेरा हाहाकार करता है,
चिकित्सक की आड़ में एक प्रेमी हर दिन सेवा में डूबा रहता है।

रोगियों का दर्द सिर्फ़ क्लिनिकल नहीं होता, ये मैं भी समझता हूँ,
हर पैरासिटामोल में मिला देता हूँ स्नेह की ठंडी पूँजी।
डॉक्टर के चेम्बर में तुम सिर्फ़ रोगी नहीं, तुम मेरी प्रार्थना हो,
नए साल के आशीर्वाद में मैं चाहता हूँ — तुम स्वस्थ रहो, तुम्हारा दिल हमेशा यादगार बना रहे।

इंजेक्शन की कंपकंपी में तुम्हारा हाथ न कांपे कभी,
मैं चाहता हूँ, आरोग्यता के साथ प्रेम भी जागे सदा।
चिकित्सा सिर्फ़ मेरा पेशा नहीं, ये प्यार की एक प्रतिज्ञा है,
रोगी का हर दर्द मेरे दिल की गहराई में लहरों की गाथा बन उठे।

१४৩२ का हर दिन हो रोगियों के लिए मौन आरोग्यता की धुनों से भरा,
जहाँ डॉक्टर-रोगी का रिश्ता पार कर जन्म ले एक विश्वास की धारा।
रोगियों के अनकहे दर्द की भाषा मैं पढ़ना चाहता हूँ,
इसी साल हो शुरुआत — स्वस्थता की एक निःशब्द यात्रा।

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